
दैनिक शुभ भास्कर विशेष अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट
बेंजामिन नेतन्याहू इसराइल के प्रधानमंत्री फिर बनेंगे
दैनिक शुभ भास्कर यरुशलम विशेष प्रतिनिधि इज़राइल में हुए ऐतिहासिक संसदीय नेसेट चुनाव के सभी वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है। इज़राइल आम चुनाव के नतीजों के बाद, बेंजामिन नेतन्याहू लॉन्गस्ट-सर्विंग पीएम का दक्षिणपंथी गठबंधन 53 सीटों के साथ सबसे बड़े गुट के रूप में उभरा है, जिससे उनके फिर से प्रधानमंत्री बनने की संभावना बहुत मजबूत है। हालांकि, इज़राइल की संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए कुल 120 सीटों में से 61 सीटों के बहुमत की आवश्यकता होती है, जो किसी भी गुट को स्पष्ट रूप से नहीं मिला है।वर्तमान में सरकार गठन और प्रधानमंत्री पद को लेकर निम्नलिखित प्रमुख स्थितियां और इज़राइल सामने आ रहे हैं:गठबंधन की चुनौतियाँ और दावेदार बेंजामिन नेतन्याहू लिकुड पार्टी: वे सरकार बनाने और प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हैं। बहुमत का जादुई आंकड़ा 61 सीटें छूने के लिए उन्हें अन्य दलों या किंगमेकर्स के समर्थन की आवश्यकता है।विपक्षी गठबंधन: विपक्ष की ओर से पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकॉट याशर पार्टी, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट बी’याचाद पार्टी और यायर लैपिड येश एटिड का गुट भी सरकार बनाने की कोशिशों में जुटा है।इज़राइल के राजनीतिक नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति आधिकारिक तौर पर उस नेता को सरकार बनाने प्रधानमंत्री बनने का पहला मौका सौंपेंगे, जिसके पास अन्य पार्टियों के समर्थन पत्र मिलाकर बहुमत साबित करने की सबसे अधिक संभावना होगी इज़राइल चुनाव के अंतिम नतीजे घोषित: किसी को बहुमत नहीं, नेतन्याहू की कुर्सी संकट में, 19 सीटों के साथ अरब पार्टियां बनीं ‘किंगमेकर’इज़राइल में हुए ऐतिहासिक संसदीय नेसेट चुनाव के सभी वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है। सेंट्रल इलेक्शन कमिटी CECद्वारा जारी अंतिम और आधिकारिक नतीजों ने देश में एक बड़ा राजनीतिक गतिरोध पैदा कर दिया है। 120 सीटों वाली इज़राइली संसद में सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों का जादुई आंकड़ा हासिल करने में कोई भी गठबंधन सफल नहीं हो सका है, जिसके चलते देश में त्रिशंकु संसद की स्थिति बन गई है। बेंजामिन नेतन्याहू का गुट बहुमत से दूर वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी ‘लिकुड’ 27 सीटें जीतकर देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी है, लेकिन उनके दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों का गठबंधन कुल 53 सीटों पर ही सिमट गया है। बहुमत से 8 सीटें दूर रहने के कारण नेतन्याहू की सत्ता में वापसी की राह बेहद कठिन हो गई है। दूसरी ओर, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट की अगुवाई वाले विपक्षी गुट ‘याशार’ को 48 सीटें मिली हैं, जिससे विपक्ष भी सरकार बनाने के आंकड़े से पीछे रह गया है।
अरब पार्टियों का ऐतिहासिक प्रदर्शन इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला और ऐतिहासिक प्रदर्शन अरब नेतृत्व वाली पार्टियों का रहा है। उन्होंने नेसेट में कुल 19 सीटें जीतकर अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। इस त्रिशंकु परिणाम के बाद अरब पार्टियां किंगमेकर की भूमिका में आ गई हैं, हालांकि इज़राइल की पारंपरिक यहूदी पार्टियों के लिए उनके साथ गठबंधन करना राजनीतिक रूप से एक बड़ी चुनौती होगी।📊 अंतिम सीट शेयरिंग कुल 120 सीटें: लिकुड बेंजामिन नेतन्याहू: 27 सीटें याशार गादी आइजनकोट: 21 सीटें बियाचाद नफ्ताली बेनेट: 12 सीटें जॉइंट लिस्ट युसेफ जबरिन: 11 सीटें
द डेमोक्रेट्स: 08 सीटें रा’आम: 08 सीटें यिसराएल बेतेनु एविगडोर लिबरमैन: 07 सीटें यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म: 07 सीटें ओत्ज्मा येहुदित इतामार बेन-गवीर: 07 सीटें शस: 06 सीटें रिलिजियस जायोनिस्ट पार्टी: 06 सीटें अब आगे क्या? राष्ट्रपति के पाले में गेंद नतीजे पूरी तरह साफ होने के बाद अब सबकी नजरें इज़राइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग पर टिकी हैं। राष्ट्रपति आने वाले दिनों में संसद में पहुंचे सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों के साथ औपचारिक बैठक करेंगे। विचार-विमर्श के बाद, राष्ट्रपति उस नेता को सरकार बनाने गठबंधन तैयार करने का पहला न्यौता देंगे, जिसके पास 61 सांसदों का समर्थन जुटाने की सबसे मजबूत संभावना होगी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बेंजामिन नेतन्याहू या गादी आइजनकोट में से कोई भी दल छोटे दलों और किंगमेकर्स के साथ मिलकर अगले कुछ हफ्तों में गठबंधन सरकार बनाने में विफल रहता है, तो इज़राइल को एक बार फिर से मध्यावधि चुनावों Re -election का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, देश में नई सरकार के गठन को लेकर भारी सस्पेंस और सियासी सौदेबाजी का दौर शुरू हो चुका है।


बेंजामिन नेतन्याहू इसराइल के प्रधानमंत्री









