
कागजों में सफल योजना, जमीन पर बदहाल व्यवस्था
सामुदायिक शौचालय में जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
नागपाल शर्मा माचाडी की रिपोर्ट
माचाडी अलवर:- टहला- राजगढ़ उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बल्देवगढ़ में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नारायणी माता सड़क मार्ग पर निर्मित सामुदायिक स्वच्छता कॉम्प्लेक्स की बदहाल स्थिति ने स्वच्छता योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो कर दिया गया,लेकिन नियमित साफ-सफाई और रखरखाव की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार शौचालय परिसर में साफ-सफाई का अभाव है और कई जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। यहां तक कि शौचालय सीट तक उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आई है। ऐसे में ग्रामीणों के साथ-साथ नारायणी माता मार्ग से गुजरने वाले आमजन और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस
ग्रामीणों का कहना है कि सामुदायिक शौचालय की बदहाल स्थिति को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है,लेकिन इसके बावजूद मौके पर व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि सरकारी स्तर पर स्वच्छता सुविधाओं के लिए बजट खर्च किया जा रहा है,तो उनका नियमित संचालन और रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी उठ रहे सवाल
इधर, क्षेत्र में सामुदायिक शौचालय की व्यवस्थाओं से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इन वीडियो के माध्यम से भी शौचालय की स्थिति और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मौके पर व्यवस्थाएं ठीक हैं तो जिम्मेदार विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि खामियां हैं तो तत्काल सुधार कराया जाना चाहिए।
खुले में शौच से कैसे बनेगा स्वच्छ गांव
एक ओर सरकार स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है और खुले में शौच से मुक्ति का लक्ष्य रखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए गए सामुदायिक शौचालयों की बदहाल स्थिति इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर शौचालय की वास्तविक स्थिति की जांच करे तथा साफ-सफाई, पानी और आवश्यक सुविधाओं की तत्काल व्यवस्था कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ कागजों में योजना को सफल बताने के बजाय उसकी जमीनी स्थिति की निगरानी जरूरी है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में आमजन तक पहुंच सके।











