हिंदुस्तान की सरकार अवैध घुसपैठ के खिलाफ कठोर कानून बनाए सारे घुसपैठियों को देश से बाहर करें – दैनिक शुभ भास्कर
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हिंदुस्तान की सरकार अवैध घुसपैठ के खिलाफ कठोर कानून बनाए सारे घुसपैठियों को देश से बाहर करें

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shubh-bhaskar Report

दैनिक शुभ भास्कर की एक विशेष रिपोर्ट

हिंदुस्तान की सरकार अवैध घुसपैठ के खिलाफ कठोर कानून बनाए सारे घुसपैठियों को देश से बाहर करें
जिन अवैध घुसपैठियो ने यहां मकान खरीद लिया है आधार कार्ड वोटर कार्ड भी बनवा लिए हैं और वर्षों से जमे हुए उनके वोटर कार्ड आधार कार्ड सब बन गए मिली भगत से बने हैं सरकार को जांच करके सारे घुसपैठियों को बाहर कर देना चाहिए यह राष्ट्रहीत में बहुत जरूरी भी है रोहिंग्‍या और बांग्‍लादेशी सिर्फ घुसपैठिए नहीं ! हर मोर्चे पर भारत को कर रहे कमजोर रोहिंग्‍या और बांग्‍लादेशी सिर्फ घुसपैठिए नहीं ! हर मोर्चे पर भारत को कर रहे कमजोर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिये नासूर बने

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दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं जो अपने यहां अवैध घुसपैठ को स्‍वीकार करे। हर देश ने घुसपैठ को रोकने के लिए कानून बना रखे हैं और उन्हें वापस उनके देश भेज दिया जाता है। किंतु भारत में स्‍वाधीनता के बाद से घुसपैठ लगातार जारी है। अभी हाल ही में एक बांग्‍लादेशी यू-टयूबर ने अपनी एक रिपोर्ट के जरिए यह बताया कि कैसे बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ की जाती है।

म्‍यांमार सीमा से भी बड़ी संख्‍या में घुसपैठिए भारत आ रहे

बांग्‍लादेश की तरफ से हजारों की संख्‍या में रोज भारत आ रहे घुसपैठियों की तरह ही म्यांमार की ओर से भी बहुत अधिक लोागों की घुसपैठ हो रही है। म्‍यांमार में वर्ष 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद भारत में घुसपैठ करनेवाली की संख्‍या में अचानक तेजी आई, जोकि लगातार जारी है। यदि इन चार सालों में इस सीमा से भारत में आए घुसपैठियों की संख्‍या का अंदाजा लगाया जाएगा तो यह संख्‍या संभावित पचास हजार से भी ऊपर पहुंच चुकी है। इनमें से परिवार के साथ बढ़ते क्रम में इनकी संख्‍या सिर्फ चार साल में ही अनुमानित डेढ़ लाख पार हो चुकी है। यानी कि एक छोटा सा कस्‍बा एक जगह भारत में म्‍यांमार की सीमा से भारत में घुसे रोहिंग्‍याओं और अन्‍य घुसपैठियों से बसाया जा सकता है, जोकि देश में सर्वत्र फैल गए हैं। ये एक जगह से आनेवालों का आंकड़ा सिर्फ चार सालों का है, जबकि भारत में घुसपैठ की ये समस्‍या लगातार पिछले 70-75 सालों से चल रही है।

भारत और बांग्‍लादेश के बीच कई किलोमीटर की खुली सीमा

यही हाल बांग्‍लादेश से लगी भारतीय सीमा का है। यहां से जत्‍थे के जत्‍थे भारत की ओर चले आ रहे हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच 4,095 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से लगभग 1,116 किलोमीटर नदी से घिरा हुआ क्षेत्र है। बांग्लादेश तीन तरफ से पांच भारतीय राज्यों – पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा से घिरा हुआ है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर काफी बड़े इलाके में बाड़ नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार ने अभी तक जमीन नहीं दी है। अकेले दक्षिण बंगाल में भारत-बांग्लादेश की 913 किलोमीटर की सीमा में अधिकांश पर अभी तक बाड़ नहीं लगी है। इनमें कई इलाके में नदी की सीमा है, जोकि लगभग 372 किलोमीटर है, सिर्फ 404 किलोमीटर पर बाड़ लग सकी है। स्‍वभाविक है ऐसे में बांग्लादेशी घुसपैठिये इनका लाभ उठाकर आसानी से भारत में प्रवेश कर जाते हैं। फिर भारत में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशियों के पास भारतीय नागरिकता के प्रमाण जैसे आधार कार्ड, वोटर कार्ड और पैन कार्ड पहले से मौजूद रहते हैं। यहां तक कि बैंकों में अकाउंट तक होते हैं। ये देश के विभिन्न हिस्सों में ज्यादातर उन इलाकों में चले जाते हैं, जहां रोजगार के साधन अधिक हैं। ये प्रायः देश के हर बड़े शहर में रहते हैं और खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताते हैं। ऐसे में इनकी पहचान करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। जबकि भारतीय नागरिकता के लिए विधिवत नियम बने हुए हैं। जिनका अनुपालन करते हुए वैध तरीके से भी भारत की नागरिकता ली जा सकती है, लेकिन बांग्‍लादेशी किसी नियम से नहीं चलते, उसमें फिर जो एक गलत कदम तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उठाया, वह आज भारत के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। इसकी गहराई में जाने के पूर्व हमें संविधान के आर्टिकल 11 को देखना होगा।                                                                                                                                                                                                                                                                                                संविधान का आर्टिकल 11 कहता है कि यह सरकार की ड्यूटी है कि वह नागरिकता देने और उसे किन्‍हीं विशेष परस्थितियों में वापस लेने के लिए कानून बनाए। सन् 1955 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस संबंध में कानून बनाया भी। राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए जो कार्य किया, उसने देश को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा दिया, इस एक निर्णय से भारत में लाखों की संख्‍या में अवैध घुसपैठ वैध हो गई।

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