
भारत और इजरायल का रणनीतिक सैन्य गठबंधन: समय की मांग
दैनिक शुभ भास्कर सुनील कुमार मिश्रा बद्री नई दिल्ली बदलते वैश्विक परिदृश्य और मध्य पूर्व में आ रहे भू-राजनी तिक बदलावों के बीच भारत और इजरायल के संबंधों को एक नए और मजबूत सैन्य गठबंधन में बदलने की सख्त जरूरत है। हाल ही में सऊदी अरब द्वारा इजरायल के साथ आधिकारिक सैन्य सहयोग के प्रस्ताव को खारिज करने की खबरों ने यह साफ कर दिया है कि क्षेत्रीय दबावों के कारण खाड़ी देश खुलकर सामने आने से कतरा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच संभावित रणनीतिक तालमेल या ब्लॉक बनने की आहट ने दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को संवेदनशील बना दिया है। ऐसे माहौल में भारत और इजरायल का एक मजबूत सैन्य गठबंधन दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।
1. सुरक्षा चुनौतियाँ और साझा खतरे
भारत और इजरायल दोनों ही लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और शत्रुतापूर्ण पड़ोसियों की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। जहाँ एक तरफ पाकिस्तान और तुर्की का बढ़ता रक्षा सहयोग भारत के लिए सुरक्षा चिंताएं पैदा करता है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल को भी इस क्षेत्र में नए गठबंधनों से रणनीतिक घेराबंदी का खतरा रहता है। एक औपचारिक सैन्य गठबंधन दोनों देशों को इन साझा खतरों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।
2. रक्षा प्रौद्योगिकी और आत्मनिर्भरता
इजरायल दुनिया की सबसे उन्नत रक्षा तकनीकों, ड्रोन सिस्टम, मिसाइल डिफेंस जैसे आयरन डोम और बराक-8 और साइबर सुरक्षा का केंद्र है। भारत पहले से ही इजरायल के सबसे बड़े रक्षा खरीदारों में से एक है। लेकिन अब समय आ गया है कि इस खरीदार-विक्रेता के रिश्ते को आगे बढ़ाकर संयुक्त अनुसंधान, सह-उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में बदला जाए। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत दोनों देश मिलकर अगली पीढ़ी के हथियार बना सकते हैं, जो दोनों सेनाओं को तकनीकी रूप से अजेय बनाएंगे।
3. खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान
कट्टरपंथ और वैश्विक आतंकी नेटवर्क से निपटने के लिए रीयल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग बेहद जरूरी है। इजरायल की खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ और भारत की ‘रॉ’ के बीच गहरा समन्वय न केवल दोनों देशों को आंतरिक व बाहरी खतरों से बचाएगा, बल्कि आतंकवाद के वित्तपोषण और साइबर हमलों को रोकने में भी गेम-चेंजर साबित होगा।
4. भू-राजनीतिक संतुलन
यदि पाकिस्तान, तुर्की और अन्य खाड़ी देशों का कोई नया गुट उभरता है, तो एशिया-भूमध्य सागर कॉरिडोर में शक्ति का संतुलन बिगड़ सकता है। भारत और इजरायल का मजबूत सैन्य और रणनीतिक गठजोड़ आई2यू2 I2U2 – भारत, इजरायल, यूएई, यूएसए जैसे मंचों को मजबूत करेगा और वैश्विक व्यापार मार्गों जैसे भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा – IMEC को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
निष्कर्ष
आज की बदलती दुनिया में कूटनीति सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रह सकती। सऊदी अरब जैसे देशों की अपनी आंतरिक और क्षेत्रीय मजबूरियां हैं, जिसके कारण वे खुलकर फैसले नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में भारत और इजरायल, जो दोनों ही मजबूत लोकतांत्रिक और सैन्य शक्तियां हैं, को बिना किसी झिझक के अपने रक्षा संबंधों को एक औपचारिक और अटूट सैन्य गठबंधन का रूप देना चाहिए। यह कदम न केवल नई दिल्ली और यरूशलेम की संप्रभुता को सुरक्षित रखेगा, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में शांति और शक्ति का संतुलन भी बनाए रखेगा।











