
फ्रांस में भारी तोड़फोड़ और आगजनी अवैध मुस्लिम घुसपैठये व प्रवासियों’ जिम्मेदार
राष्ट्रपति मैक्रों बोले- “यह वामपंथी दंगाइयों की साजिश”
दैनिक शुभ भास्कर पेरिस/वाशिंगटन: फ्रांस में महंगाई, बजट कटौती और स्कूलों की बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब एक भीषण अंतरराष्ट्रीय और राजनीतिक विवाद में बदल चुका है। राजधानी पेरिस सहित कई बड़े फ्रांसीसी शहरों में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा, आगजनी और ऐतिहासिक इमारतों को जलाए जाने के बाद अब 😭 “अवैध प्रवासियों और मुस्लिम घुसपैठियों” की भूमिका को लेकर वैश्विक स्तर पर तीखी बहस छिड़ गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार सहित कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने फ्रांस के इन बिगड़ते हालातों के लिए बेलगाम प्रवासन को मुख्य वजह बताया है। “फ्रांस जल रहा है, सीमाओं को तुरंत बंद करो”: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर फ्रांस के हालातों पर चिंता जताते हुए एक बेहद कड़ा बयान जारी किया है। ट्रंप ने कहा, “फ्रांस जल रहा है! पूरी तरह से अलग दुनिया से आए प्रवासियों ने, जिनके दिलों में नफरत भरी है, इस महान देश को तबाह कर दिया है। अपनी सीमाओं को तुरंत बंद करो और नियंत्रण हाथ में लो, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।” अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी सोशल मीडिया पर लिमोज शहर के टाउन हॉल में लगी आग का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि पश्चिमी देशों ने ‘विविधता’ के नाम पर बिना सोचे-समझे प्रवासियों को आने दिया, जिसका नतीजा आज फ्रांस भुगत रहा है।
हंगरी और यूरोपीय दक्षिणपंथियों का दावा- “यह बेलगाम प्रवासन का नतीजा”हंगरी के दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने कहा कि फ्रांस की सड़कों पर दिख रही ‘विवेकहीन तबाही और अनुचित हिंसा’ यह साफ करती है कि प्रवासन को लेकर सख्त रुख अपनाना क्यों जरूरी है। फ्रांस के भीतर भी दक्षिणपंथी धड़े और सोशल मीडिया पर कई विश्लेषक यह आरोप लगा रहे हैं कि विरोध प्रदर्शनों की आड़ में अवैध रूप से रह रहे कट्टरपंथी और आप्रवासी तत्व ही सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बना रहे हैं, दुकानों को लूट रहे हैं और कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।
सरकारी आंकड़ा: 2,400 गिरफ्तार, 1,000 सुरक्षाकर्मी घायल
फ्रांसीसी गृह मंत्रालय के अनुसार, शनिवार और रविवार को हुए देशव्यापी हिंसक प्रदर्शनों में अब तक 2,397 लगभग 2,400 उपद्रवियों को
गिरफ्तार किया जा चुका है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास में करीब 997 पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल के जवान घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर है। उपद्रवियों ने लिमोज के 143 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल सहित कई सरकारी इमारतों और लग्जरी शोरूमों को आग के हवाले कर दिया है। राष्ट्रपति मैक्रों का पक्ष: प्रवासियों पर चुप, ‘अति-वामपंथी दंगाइयों’ को ठहराया दोषी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे प्रवासन के आरोपों के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश को संबोधित किया। मैक्रों ने हिंसा के पीछे सीधे तौर पर किसी धार्मिक या आप्रवासी समूह का नाम नहीं लिया, बल्कि उन्होंने इस तबाही के लिए ‘अति-वामपंथी अराजक समूहों’ और आपराधिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है। मैक्रों ने देश को भरोसा देते हुए कहा, “जिन्होंने गणतंत्र को गिराने की कोशिश की है और संपत्तियों को नष्ट किया है, उन्हें अपने अपराधों की भारी कीमत चुकानी होगी।”
संपादकीय दृष्टिकोण: फ्रांस में यह दंगे भले ही आर्थिक और शैक्षिक मुद्दों पर शुरू हुए हों, लेकिन हिंसा में शामिल उपद्रवियों की पृष्ठभूमि और फ्रांस की जनसांख्यिकी के कारण अब यह लड़ाई पूरी तरह से ‘प्रवासन बनाम राष्ट्रवाद’ के बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुकी है। अगले साल होने वाले फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव में यह मुद्दा सबसे निर्णायक साबित होने वाला है।











