
दैनिक शुभ भास्कर विशेष आलेख:
विशेष विश्लेषण: आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ और देश विरोधी गतिविधियों का राजनीतिक सच
दैनिक शुभ भास्कर सुनील कुमार मिश्रा बद्री नई दिल्ली भारत की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा हमेशा से ही देश के नीति निर्माताओं और आम नागरिकों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। वर्तमान समय में, जब दुनिया भर में ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ सूचना और तकनीक के जरिए लड़ा जाने वाला अदृश्य युद्ध का खतरा बढ़ रहा है, तब देश के भीतर और बाहर सक्रिय देश विरोधी ताकतों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतीय कानून, खुफिया एजेंसियों और सरकार की आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, देश को अस्थिर करने का प्रयास करने वाले कुछ खास प्रतिबंधित संगठन हैं और इनके पीछे काम करने वाले तत्वों के कई विशिष्ट कारण हैं। भारत के दुश्मन और देश विरोधी संगठन कौन से हैं? भारतीय न्याय व्यवस्था और गृह मंत्रालय के अनुसार, किसी भी मुख्यधारा की पंजीकृत राजनीतिक पार्टी को आधिकारिक तौर पर ‘देश विरोधी’ या ‘दुश्मन’ घोषित नहीं किया गया है। भारत के संविधान के तहत लोकतांत्रिक दायरे में काम करने वाले दलों में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वे कानूनन वैध हैं।
हालाँकि, गृह मंत्रालय MHAने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम UAPAके तहत कई संगठनों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए आतंकवादी और प्रतिबंधित संगठनों की सूची में डाला है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
ही हिस्सा है, इसे देशद्रोह नहीं कहा जा सकता।
निष्कर्ष: भारत की सेनाएं, सुरक्षा एजेंसियां और न्यायपालिका किसी भी आंतरिक या बाहरी सुरक्षा खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। किसी भी लोकतंत्र की असली ताकत उसके नागरिकों की जागरूकता में होती है। यह स्पष्ट है कि जहां एक तरफ सीमा पार के दुश्मन और आंतरिक प्रतिबंधित संगठन भारत को कमजोर करने की फिराक में रहते हैं, वहीं भारतीय समाज और लोकतांत्रिक संस्थाएं इन साजिशों को नाकाम करने के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। देश के विकास और सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाई जाए।
दैनिक शुभ भास्कर विशेष रिपोर्ट











