
राम से राष्ट्र’ और ‘देव से देश’: विजयादशमी पर पीएम मोदी ने गिनाए देश के 3 बड़े दुश्मन,
नागरिकों से एकजुट होने की अपील
दैनिक शुभ भास्कर ब्यूरो, नई दिल्ली
विजयादशमी के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन मैदान में आयोजित भव्य रामलीला समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने विधि-विधान से भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता का स्वरूप धारण किए कलाकारों की आरती उतारी और इसके बाद प्रतीकात्मक तीर चलाकर रावण दहन की परंपरा को पूरा किया। रावण दहन के उपरांत देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक अत्यंत ओजस्वी और दिशा-निर्देशक भाषण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने देश की प्रगति में बाधक बन रहे तीन सबसे बड़े आंतरिक शत्रुओं की पहचान की और समस्त देशवासियों से इनके खिलाफ मिलकर लड़ने का आह्वान किया।
पीएम मोदी ने देश के सामने रखे 3 सबसे बड़े दुश्मन:
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के समय में यदि हमें एक सशक्त और समर्थ भारत का निर्माण करना है, तो हमें इन तीन विकृतियों को जड़ से समाप्त करना होगा:
1. देश के मान-सम्मान को चोट पहुंचाने वाली ताकतें: वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती साख को धूमिल करने की कोशिश करने वाली शक्तियों को देश की एकता के लिए खतरा बताया।
2. समाज में फूट डालने वाले लोग: जाति, धर्म या संप्रदाय के नाम पर समाज का ताना-बाना छिन्न-भिन्न करने वाले और भेदभाव पैदा करने वाले तत्वों को देश का दूसरा बड़ा शत्रु करार दिया।
3. भारतीय संस्कृति से नफरत करने वाली मानसिकता: देश के सांस्कृतिक मूल्यों, विरासत और सनातन पहचान के प्रति द्वेष रखने वाली सोच पर प्रहार करते हुए इसे देश की आत्मा को कमजोर करने वाली मानसिकता बताया। राम राज्य’ का मूल मंत्र: न्याय और वंचितों की सेवा
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्शों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि “राम से राष्ट्र तक और देव से देश तक हमारी अटूट संकल्पना है”। ‘राम राज्य’ की अवधारणा को समझाते हुए उन्होंने कहा कि राम राज्य में शासन का एकमात्र उद्देश्य जनता की भलाई और कल्याण होता है। जहां किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और पूर्ण न्याय मिलता है। पीएम मोदी ने समाज और सरकार दोनों को संदेश देते हुए कहा कि हमारा सबसे पहला कर्तव्य उन गरीबों और वंचितों की सेवा करना है, जिन्हें आगे बढ़ने के लिए सहारे की जरूरत है। त्योहार केवल उत्सव नहीं, संकल्प का माध्यम हैं समारोह में देशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विजयादशमी का यह पावन पर्व हमें केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं देता, बल्कि यह हमें बुराई के खिलाफ मजबूती से खड़े होने और हमेशा सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने और देश की सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एकजुट होने का संकल्प लेने की अपील की।











