
जम्मू-कश्मीर में विजयादशमी की धूम: परेड ग्राउंड में फारूक अब्दुल्ला ने लगाया ‘जय श्री राम’ का नारा,
34 साल बाद कश्मीर में मना ऐतिहासिक दशहरा, 5000 से अधिक लोगों ने देखा रावण दहन
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दैनिक शुभ भास्कर ब्यूरो जम्मू-कश्मीर में विजयादशमी दशहरा का पावन त्योहार पूरे पारंपरिक हर्षोल्लास, धार्मिक श्रद्धा और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मनाया गया। जम्मू संभाग से लेकर कश्मीर घाटी तक विभिन्न मैदानों में अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक स्वरूप रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के विशाल पुतलों का दहन किया गया। इस दौरान केंद्र शासित प्रदेश की साझा संस्कृति कश्मीरियत और सांप्रदायिक सौहार्द की कई खूबसूरत तस्वीरें देखने को मिलीं।
जम्मू: ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में उमड़ा जनसैलाब, फारूक अब्दुल्ला रहे मुख्य अतिथि
जम्मू संभाग का सबसे मुख्य और भव्य दशहरा कार्यक्रम ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया। सनातन धर्म सभा और धर्मार्थ ट्रस्ट के तत्वावधान में शहर में पहले एक विशाल विजयदशमी शोभा यात्रा निकाली गई, जिसके बाद पुतला दहन का कार्यक्रम शुरू हुआ।
समारोह में नेशनल कॉन्फ्रेंस NC के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मंच से जनता को संबोधित करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने भाईचारे और एकता पर विशेष जोर दिया।
• कौमी एकता का संदेश: डॉ. अब्दुल्ला ने कहा, “भगवान राम का संदेश किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए था। उनका जीवन हमें भाईचारा और मर्यादा सिखाता है।”
• नशे के खिलाफ अपील: उन्होंने युवाओं से नशे की लत और सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का आह्वान किया।
• जय श्री राम के नारे: अपने संबोधन के अंत में फारूक अब्दुल्ला ने पूरे उत्साह के साथ मंच से ‘जय श्री राम’ और ‘जय हिंद’ के नारे लगाए, जिसका उपस्थित जनसमूह ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। इसके बाद 90 फुट ऊंचे रावण के पुतले का आतिशबाजी के बीच दहन किया गया। श्रीनगर: शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में गूंजे श्रीराम के जयकारे

कश्मीर घाटी में भी दशहरे को लेकर भारी उत्साह देखा गया। श्रीनगर के प्रसिद्ध शेर-ए-कश्मीर SK क्रिकेट स्टेडियम में “कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति” KPSS द्वारा भव्य पुतला दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
• मुस्लिम कारीगरों की कला: घाटी में सांप्रदायिक सद्भाव की एक और अनूठी मिसाल तब देखने को मिली जब पता चला कि रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के इन विशाल पुतलों का निर्माण स्थानीय मुस्लिम कारीगरों द्वारा किया गया था।
• पर्यटकों का जमावड़ा: कश्मीरी पंडितों और स्थानीय मुस्लिमों के साथ-साथ बड़ी संख्या में घाटी घूमने आए देश-विदेश के पर्यटकों ने भी इस उत्सव का आनंद लिया और एक-दूसरे को दशहरे की बधाई दी।सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम त्योहार के मद्देनजर पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चौबंद रही। खुफिया इनपुट और भीड़ को देखते हुए दोनों राजधानियों जम्मू और श्रीनगर के आयोजन स्थलों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। चप्पे-चप्पे पर निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद ली गई, जिसके चलते पूरा उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।











