मिलावटखोरों की सेहत का ख्याल रिश्वत से, जनता की सेहत भगवान भरोसे! – दैनिक शुभ भास्कर
Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

मिलावटखोरों की सेहत का ख्याल रिश्वत से, जनता की सेहत भगवान भरोसे!

Author Image
Written by
shubh-bhaskar Report

मिलावटखोरों की सेहत का ख्याल रिश्वत से, जनता की सेहत भगवान भरोसे!

नकली कलाकंद मामले में कथित सौदेबाजी का आरोप, आखिर मिलावट पर लगाम लगाएगा कौन?

Advertisement Box

नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट

(माचाडीअलवर):-अलवर- अलवर जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट सीधे तौर पर आमजन की सेहत से जुड़ा गंभीर मामला है। लोग मिठाई खरीदते समय उसकी शुद्धता पर भरोसा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जिम्मेदार एजेंसियां मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करेंगी। लेकिन खैरथल-तिजारा में नकली कलाकंद से जुड़े मामले में कथित रिश्वतखोरी का प्रकरण सामने आने के बाद कार्यवाही की निष्पक्षता और व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, नकली कलाकंद बनाने के आरोप में जांच के दायरे में आए एक कारखाने का माल नष्ट नहीं करवाने और फैक्ट्री को सीज होने से बचाने के बदले 2.20 लाख रुपये मांगने का आरोप है। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जिला विशेष टीम (डीएसटी) के दो कांस्टेबलों को कथित तौर पर ०2 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
मिठाई में मिलावट से लेकर कार्यवाही तक, हर स्तर पर जवाबदेही जरूरी
इस मामले ने एक बार फिर खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने वाली व्यवस्था की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। यदि मिलावट के आरोपों की जांच और कार्यवाही के दौरान ही कथित सौदेबाजी होती है, तो आमजन का भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है। खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करना केवल संबंधित विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा से जुड़ा अहम दायित्व भी है।
आम आदमी हर मिठाई की गुणवत्ता की जांच प्रयोगशाला में नहीं करा सकता। वह दुकानदार और प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा करके खाद्य पदार्थ खरीदता है। ऐसे में मिलावट के मामलों में कथित अनियमितता सामने आना चिंता का विषय है। सवाल यह भी है कि यदि किसी कारखाने में मिलावट की आशंका है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है और कार्यवाही में पारदर्शिता कैसे बनी रहेगी?
जांच निष्पक्ष हो, दोषियों की जिम्मेदारी तय हो
इस पूरे प्रकरण में जरूरी है कि एसीबी की जांच निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित हो। कथित रिश्वतखोरी में शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ नकली कलाकंद के निर्माण और उसकी बिक्री से जुड़े पहलुओं की भी नियमानुसार जांच होनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा से संबंधित विभागों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि मिलावट के मामलों में नमूनों की जांच, जब्ती, माल के निस्तारण और अन्य कार्यवाही में नियमों का पालन हो।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मिलावट रोकने और कार्यवाही में सहयोग करने वाली व्यवस्था से जुड़े लोगों पर ही रिश्वतखोरी के आरोप लगें, तो आमजन अपनी सेहत की सुरक्षा के लिए किस पर भरोसा करे? मिठाई की शुद्धता की जांच प्रयोगशाला कर सकती है, लेकिन व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना संबंधित विभागों और जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है।

आज का राशिफल

वोट करें

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया के सामने रोज बेनकाब हो रहे पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को फिर से विचार करना चाहिए?

Advertisement Box

गुरुवार, 05 नवंबर 2026

आज का सुविचार

धैर्य एक ऐसी सवारी है जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती, न किसी के कदमों में और न किसी की नजरों में। कठिन समय में धैर्य ही आपका सबसे बड़ा मित्र साबित होता है।

Advertisement Box

और भी पढ़ें

पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल एवं जिलाधिकारी वाराणसी सत्येन्द्र कुमार द्वारा माँ अन्नपूर्णा मंदिर की सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

✕
[news_reels]
WhatsApp