
रामलीला मैदान से ‘INDIA’ गठबंधन की हुंकार, राहुल गांधी का बड़ा आरोप—
संविधान से बड़ी नहीं है मोदी सरकार’
‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ विपक्ष का ‘चलो दिल्ली’ मार्च, खुली बस में एकजुट दिखे दिग्गज नेता
• राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर साधा निशाना; त्योहारों के मौसम में स्थानीय व्यापारियों की मदद की भी अपील की
शुभ भास्कर ब्यूरो, नई दिल्ली
देश की राजधानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी दलों के ‘INDIA’ गठबंधन ने एक विशाल महारैली का आयोजन कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। राहुल गांधी की रैली में कितनी भीड़ राहुल गांधी की इस महारैली में विपक्षी नेताओं द्वारा भारी जनसैलाब का दावा किया गया है. इसके विपरीत, सुरक्षा व्यवस्था को संभालने वाली दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन का व्यावहारिक आकलन पूरी तरह अलग होता है. पुलिस सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के दृष्टिकोण से यह मानकर चलती है कि इस पूरे परिसर और आसपास के रास्तों को मिलाकर अधिकतम 40,000 से 50,000 की भीड़ को ही सुरक्षित और प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है.

रामलीला मैदान में रैली करने के लिए कितनी जगह, यहां कितने लोग आ सकते हैं? सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन का खाका रैली के दौरान किसी भी अनहोनी से बचने और भगदड़ जैसी स्थिति को रोकने के लिए मैदान को कुल 14 अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया है. हर जोन में प्रवेश और निकास के लिए अलग से बैरिकेड्स लगाए गए हैं. यदि कार्यकर्ताओं की संख्या मैदान की तय क्षमता से अधिक हो जाती है, तो प्रशासन ने मैदान के बाहर की सड़कों और आसपास की खुली जगहों पर अतिरिक्त होल्डिंग एरिया बनाए हैं. इसके अलावा, CJP के अभिजीत दिपके जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया है, लेकिन वो इसमें नहीं शामिल हुए ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ आयोजित इस “चलो दिल्ली” मार्च और महारैली में विपक्ष के 20 से अधिक दलों के शीर्ष नेता एक मंच पर नजर आए। रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए और दो टूक कहा कि देश का लोकतंत्र और संविधान किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। खुली बस में एकजुटता का संदेश महारैली की शुरुआत एक अभूतपूर्व दृश्य के साथ हुई। कांग्रेस अध्यक्ष के आवास से रामलीला मैदान तक विपक्ष के तमाम शीर्ष नेताओं ने एक खुली बस में मार्च निकाला।

इस बस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी सहित विपक्षी गठबंधन के कई दिग्गज एक साथ सवार थे। इस मार्च के जरिए विपक्ष ने आगामी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए अपनी अटूट एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया। मुख्य चुनाव आयुक्त पर देशद्रोह का आरोप रामलीला मैदान में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए राहुल गांधी के निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार रहे। राहुल गांधी ने हालिया चुनावी तौर-तरीकों और मतदाता सूची से जुड़े विवादों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से करोड़ों पात्र मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटा दिए गए हैं। राहुल गांधी ने इसे एक ‘देश विरोधी कृत्य’ करार देते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर देशद्रोह के समान है, क्योंकि यह जनता के वोट देने के मौलिक अधिकार पर हमला है ‘संविधान सबसे महान है’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि कोई भी सत्ता संविधान से ऊपर नहीं हो सकती। उन्होंने गरजते हुए कहा, “मोदी सरकार संविधान से बड़ी नहीं है। इस देश में संविधान ही सबसे महान है और हम इसकी सर्वोच्चता की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे।”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। त्योहारी सीजन में स्थानीय व्यापारियों की चिंता अपने राजनीतिक भाषण के बीच राहुल गांधी ने एक संवेदनशील अपील भी की। दिवाली, छठ और भाईदूज जैसे बड़े त्योहारों का हवाला देते हुए उन्होंने देश के कोने-कोने से दिल्ली आए पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से कहा कि वे केवल रैली में शामिल होकर न लौटें। उन्होंने अपील की, “आप सभी दिल्ली के स्थानीय बाजारों में जाएं और वहां से खरीदारी करें, ताकि त्योहारों के इस मौसम में यहां के छोटे और मध्यम व्यापारियों को आर्थिक रूप से फायदा पहुंच सके बीजेपी का पलटवार: ‘राजनीतिक स्वार्थ की रैली’ दूसरी तरफ, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी BJP ने विपक्ष की इस महारैली पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बीजेपी प्रवक्ताओं ने इस आयोजन को पूरी तरह से ‘राजनीतिक स्वार्थ’ से प्रेरित बताया। सत्तापक्ष की ओर से कहा गया कि जांच एजेंसियों और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के लिए विपक्ष इस तरह के हथकंडे अपना रहा है, लेकिन देश की जनता इनके बहकावे में आने वाली नहीं है इस महारैली में भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विपक्षी नेताओं के तीखे तेवरों से साफ है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने वाला है।











