
बच्चों को दीपावली के उपहार बांटकर दिया सेवा, समरसता और संस्कारों का संदेश
दैनिक शुभ भास्कर भुवनेश आमेटा राजस्थान उदयपुर दीपावली की खुशियां तभी सार्थक होती हैं, जब उनका प्रकाश समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के घर तक पहुंचे। इसी भावना को साकार करते हुए आलोक संस्थान द्वारा पिछले 40 वर्षों से संचालित दीपावली सेवा अभियान ‘उनके घर भी दिया जले’ का प्रथम चरण आज बारापाल के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जोगीवाडा में उत्साह और उल्लास के साथ प्रारंभ हुआ।आलोक संस्थान के निदेशक एवं अभियान संयोजक श्रीगुरु डॉ. प्रदीप कुमावत ने वनवासी अंचल के विद्यार्थियों को दीपावली के उपहार वितरित कर, उनके साथ सामूहिक स्नेह भोज कर तथा लाफ्टर योगा के माध्यम से बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरकर अभियान का शानदार आगाज किया।इस अवसर पर डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि मनुष्य के संस्कार बचपन में ही विकसित होते हैं और बचपन में सीखे गए संस्कार जीवनभर स्थायी रहते हैं। यदि बाल्यावस्था से ही बच्चों में देने, बांटने और दूसरों की खुशियों में सहभागी बनने का संस्कार विकसित किया जाए तो वे जीवन में कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं, अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को कभी नहीं भूलते। इसी सोच के साथ इंटरैक्ट क्लब आलोक के माध्यम से पिछले 40 वर्षों से विद्यार्थियों में सेवा, सहयोग और समरसता के संस्कार विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि गांवों और वनवासी अंचलों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गोदड़ी के लाल गांवों की मिट्टी से ही निकलते हैं। इसी अंचल से लिम्बाराम जैसे महान तीरंदाज ने निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। आवश्यकता है कि इन बच्चों को उचित अवसर, प्रोत्साहन और सकारात्मक वातावरण मिले।कार्यक्रम के दौरान डॉ. कुमावत ने विद्यार्थियों को लगभग 25 प्रकार के लाफ्टर योगा अभ्यास करवाए, जिससे बच्चे हंसी और उत्साह से सराबोर हो गए। उन्होंने दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए बच्चों को मिठाई, दीपक और विभिन्न उपयोगी उपहार भी वितरित किए अभियान के अंतर्गत सेवा के साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश भी दिया गया। रोटरी इंटरनेशनल के हैंड वॉश कार्यक्रम के तहत डॉ. कुमावत ने बच्चों को हाथ धोने की सही वैज्ञानिक विधि समझाई और व्यावहारिक रूप से हाथ धुलवाकर बताया कि भोजन करने से पहले स्वच्छ हाथ रखना क्यों आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाथों की स्वच्छता अनेक बीमारियों से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम है। बच्चों को भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।इस अवसर पर आयुर्वेद विभाग की डॉ. लता त्रिवेदी ने भी बच्चों को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए।कार्यक्रम के प्रारंभ में आलोक नेचर स्कूल की प्राचार्य वंदना त्रिवेदी ने ‘उनके घर भी दिया जले’ अभियान की 40 वर्षों की यात्रा, उसके उद्देश्य और सामाजिक सरोकारों का परिचय दिया। स्थानीय विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों ने अतिथियों का पगड़ी एवं उपरणा पहनाकर स्वागत और अभिनंदन किया।इस अवसर पर प्रिंसिपल ज्योति विजय, प्रधानाध्यापिका नीलिमा, रोशन मीणा, उप सरपंच राज कुमार सहित गणमान्य उपस्थित थे। पांच चरणों में चलेगा अभियानउल्लेखनीय है कि आलोक संस्थान का ‘उनके घर भी दिया जले’ अभियान दीपावली से छोटी दीपावली तक पांच चरणों में संपन्न होगा। इसके द्वितीय चरण में कल राजनगर में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जबकि तृतीय चरण में उदयपुर के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा गतिविधियां आयोजित होंगी।इस अभियान के अंतर्गत आलोक संस्थान के विद्यार्थी लाखों रुपये की सामग्री, दीपावली के उपहार और मिठाई लेकर ग्रामीण एवं वनवासी अंचलों के बच्चों तक पहुंचते हैं। केवल उपहार वितरित करना ही इस अभियान का उद्देश्य नहीं है बल्कि बच्चों के साथ बैठकर भोजन करना, खेलना, संवाद करना और उनके सुख-दुख में सहभागी बनना इसकी विशिष्ट पहचान है।











