
अलवर में आरक्षण लॉटरी पूरी, पंचायती राज चुनाव की राह खुली।
39 जिला परिषद वार्ड, 11 पंचायत समिति प्रधान और 221 पंचायत समिति सदस्य पदों का आरक्षण तय; आज सरपंच और वार्ड पंचों की लॉटरी।
नागपाल शर्मा माचाडी की रिपोर्ट
(माचाडीअलवर):-अलवर- राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब समाप्ति की ओर है। अलवर जिले में पंचायती राज चुनाव-2026 के लिए आरक्षण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। बुधवार को जिला मुख्यालय पर जिला परिषद सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों, पंचायत समिति सदस्य वार्डों और पंचायत समिति प्रधान पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके साथ ही जिले में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है।
अलवर जिले में 39 जिला परिषद वार्ड, 11 पंचायत समिति प्रधान पद और 221 पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए आरक्षण निर्धारित किया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आर्तिका शुक्ला के निर्देशन में यह प्रक्रिया जिला कलेक्ट्रेट स्थित मिनी सचिवालय में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुई। आरक्षण की श्रेणी सामने आने के बाद अब संभावित प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
सरपंच और वार्ड पंचों की लॉटरी
आरक्षण प्रक्रिया के अगले चरण में 24 सितंबर को ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी उपखंड स्तर पर कराई जा रही है। संबंधित उपखंड अधिकारियों की देखरेख में ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच पदों का आरक्षण तय होगा। इसके बाद जिले की ग्राम पंचायतों में कौन-सी सीट सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होगी, इसकी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
अलवर जिले में 309 ग्राम पंचायतों के सरपंच पदों के साथ वार्ड पंच पदों का आरक्षण भी निर्धारित किया जाना है। इस प्रक्रिया पर ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशियों,राजनीतिक दलों और ग्रामीण मतदाताओं की विशेष नजर बनी हुई है।
लॉटरी से बदले कई दावेदारों के समीकरण
आरक्षण की लॉटरी पूरी होने के साथ ही गांवों में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। लंबे समय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कई संभावित दावेदारों को अब अपनी सीट की आरक्षण श्रेणी के अनुसार रणनीति बदलनी पड़ सकती है। जिन सीटों पर सामान्य वर्ग के दावेदार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, यदि वे सीटें महिला या आरक्षित वर्ग के खाते में चली गई हैं तो वहां नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
इसी तरह महिला आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में महिला दावेदार भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में जुटेंगी। राजनीतिक दलों के लिए भी आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाएगी।
निकाय चुनाव के बाद अब गांवों में बढ़ेगी राजनीतिक सरगर्मी
राजस्थान में हाल ही में नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी हुई है। निकायों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष के बाद उपमहापौर, उपसभापति एवं उपाध्यक्ष के चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं। इसके बाद अब प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र ग्रामीण क्षेत्र बनने वाला है। निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायती राज चुनावों की तैयारियों को गति मिलना तय माना जा रहा है।
पंचायती राज चुनावों के लिए आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पहले 17 और 18 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन नगरीय निकाय चुनावों में प्रशासनिक अधिकारियों की व्यस्तता के चलते इसे आगे बढ़ाकर 23 और 24 सितंबर किया गया। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 23 सितंबर को जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और प्रधान पदों के लिए तथा 24 सितंबर को सरपंच एवं वार्ड पंच पदों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया निर्धारित की गई थी।
चुनाव कार्यक्रम का इंतजार
आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की नजरें राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाले पंचायती राज चुनाव कार्यक्रम पर टिक गई हैं। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद राजनीतिक दलों के साथ-साथ संभावित प्रत्याशियों की गतिविधियां तेज होंगी। गांव-गांव बैठकों का दौर शुरू होने, समर्थकों की लामबंदी और टिकट के लिए दावेदारी बढ़ने की संभावना है।
राज्य सरकार की ओर से पंचायती राज संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में आरक्षण लॉटरी पूरी होने के बाद चुनावी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
गांवों में शुरू होगा दावेदारियों का दौर
आरक्षण की स्थिति साफ होते ही अब गांवों में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ेगी। सरपंच से लेकर वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य तक के पदों के लिए दावेदार अपने-अपने स्तर पर संपर्क अभियान तेज करेंगे। राजनीतिक दल भी मजबूत दावेदारों की तलाश और स्थानीय समीकरणों को साधने में जुटेंगे।
अलवर जिले में बड़ी संख्या में पंचायतों और वार्डों के आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद अब ग्रामीण राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। कई पुराने दावेदारों की राह बंद होगी तो नए चेहरों के लिए चुनावी मैदान खुल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में गांवों की चौपालों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक पंचायती राज चुनाव ही चर्चा का प्रमुख विषय रहने की संभावना है।
आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अलवर में पंचायती राज चुनाव का रास्ता अब पूरी तरह साफ होता नजर आ रहा है। अब इंतजार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का है।











