
कांग्रेस के युवराज
मुख्य चुनाव आयुक्त के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से भी इस्तीफे की मांग
भाजपा ने कहा- ‘अराजक कांग्रेस’
दैनिक शुभ भास्कर सुनील कुमार मिश्रा बद्री नई दिल्ली कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी प्रियंका वाड्रा दोनों भाई बहन ने देश में आराजकता का माहौल बनाए हुए अवैध मुस्लिम रोहिया बांग्लादेशी घुटपेशियों को देश के वोटर बनाना चाहते हैं ताकि इनके दम पर कांग्रेस की सरकार बनी रहे सभी विपक्षी दल भी यही चाहते है प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक खींचतान में घसीटने का विपक्ष का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ SIR और कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े कांग्रेस और ‘INDIA’ गठबंधन के निशाने पर अब देश की न्यायपालिका के शीर्ष पुरुष आ गए हैं। कांग्रेस की केरल इकाई द्वारा सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत से खुलेआम इस्तीफा मांगने के बाद देश का राजनीतिक पारा पूरी तरह गरमा गया है। हालांकि, चौतरफा आलोचना और विवाद बढ़ता देख कांग्रेस ने बाद में इस पोस्ट को डिलीट कर दिया।

निशाने पर आए चीफ जस्टिस सूर्यकांत?
यह पूरा विवाद तब और बढ़ गया जब कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी प्रियंका वाड्रा विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। चूंकि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए सीजेआई सूर्यकांत ने कांग्रेस नेताओं से मिलने से साफ इनकार कर दिया और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करने की सलाह दी।
इसके साथ ही, दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शनों के कारण लगी सुरक्षा पाबंदियों पर मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह कानून और व्यवस्था का मुद्दा है, यह मेरा विषय अधिकार क्षेत्र नहीं है।”
सीजेआई के इस तटस्थ बयान से तिलमिलाई कांग्रेस की केरल इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पूर्व में ट्विटर पर सीधे चीफ जस्टिस को टैग करते हुए लिख दिया— “प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून और व्यवस्था आपका काम नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह कोई ऐसा व्यक्ति ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।” भाजपा का पलटवार: ‘यह विपक्ष की अराजकता का प्रमाण’

कांग्रेस द्वारा देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ ऐसी भाषा के इस्तेमाल पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने इस कृत्य को भारतीय संविधान और न्यायपालिका का घोर अपमान बताते हुए कांग्रेस को ‘अराजक कांग्रेस’ करार दिया। सत्तापक्ष का कहना है कि जब भी संवैधानिक संस्थाएं या अदालतें विपक्ष की मर्जी के मुताबिक काम नहीं करतीं, तो विपक्ष उन पर दबाव बनाने के लिए इसी तरह की अराजकता और धमकी भरी राजनीति पर उतर आता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहले चुनाव आयोग और अब सीधे न्यायपालिका के प्रमुख पर इस तरह के हमले संवैधानिक गरिमा की सीमाओं को लांघने जैसे हैं। सोशल मीडिया पर मचे भारी बवाल और चौतरफा निंदा के बाद भले ही केरल कांग्रेस ने अपनी पोस्ट हटा ली हो, लेकिन इस विवाद ने देश में ‘संस्थाओं की स्वायत्तता बनाम राजनीतिक दबाव’ की बहस को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।

लेकिन केंद्र की सरकार उनके किसी भी दबाव में आने वाली नहीं देश की जनता सब देख रही है समझ भी रही है इनको नकार चुकी है











