
भारत इजराइल का सैन्य समझौता राष्ट्रहित में यह क्यों जरूरी है मुख्य कारण
दैनिक शुभ भास्कर संपादक सुनील कुमार मिश्रा बद्री भारत और इजरायल दोनों ही ऐसे राष्ट्र हैं जो अपनी स्थापना के समय से ही आक्रामक पड़ोसियों और सीमा पार से होने वाले आतंकवाद का सामना कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में एक मजबूत रक्षा समझौता निम्नलिखित कारणों से भारत के हित में है:’टू-फ्रंट वॉर’ चीन-पाकिस्तान का अचूक तोड़भारत को एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इजरायल के पास दुनिया का सबसे उन्नत खुफिया तंत्र और अत्याधुनिक सैन्य तकनीक है। एक मजबूत रक्षा समझौते के जरिए भारत को युद्ध की स्थिति में रीयल-टाइम सैटेलाइट खुफिया डेटा, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सपोर्ट और त्वरित हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जो दुश्मनों के हौसले पस्त करने के लिए काफी है।मेक इन इंडिया’ और रक्षा आत्मनिर्भरता को रफ्तारभारत लंबे समय से अपनी सैन्य जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। इजरायल के साथ मजबूत रक्षा समझौते से केवल हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि संयुक्त अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा। ‘आयरन डोम’ जैसी मिसाइल डिफेंस तकनीक, खतरनाक लड़ाकू ड्रोन और अत्याधुनिक रडार प्रणालियों का निर्माण भारत में ही होने से देश रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेगा।आधुनिक युद्ध के नए खतरों से सुरक्षा आज युद्ध केवल सीमाओं पर टैंकों और सैनिकों से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर स्पेस और एआई के जरिए लड़े जा रहे हैं। इजरायल साइबर सुरक्षा और एआई-संचालित सैन्य साजो-सामान में दुनिया का नेतृत्व करता है। इजरायल के साथ गहरे जुड़ाव से भारत का डिजिटल और सैन्य बुनियादी ढांचा किसी भी विदेशी साइबर हमले से अभेद्य हो जाएगा।. पश्चिम एशिया के नए समीकरणों में संतुलन वैश्विक मंच पर तुर्की, पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों के बीच बढ़ते सामरिक जुड़ाव को देखते हुए भारत को मध्य-पूर्व पश्चिम एशिया में एक मजबूत और अडिग साथी की जरूरत है। इजरायल इस क्षेत्र में भारत का सबसे स्वाभाविक और परखा हुआ सहयोगी है।
🤝 स्वाभाविक साझेदारी
: जो संकट में परखी गई
भारत के इतिहास में जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर संकट आया, इजरायल हमेशा बिना किसी शर्त के भारत के साथ खड़ा रहा:1999 का कारगिल युद्ध: जब भारत को ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों पर सटीक निशाना लगाने के लिए लेजर-गाइडेड मिसाइलों और खुफिया तस्वीरों की तत्काल आवश्यकता थी, तब इजरायल ने अपने भंडार खोल दिए थे।आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: दोनों ही देश कट्टरपंथ और आतंकवाद के भुक्तभोगी हैं, इसलिए आतंकवाद विरोधी अभियानों और शहरी युद्ध की रणनीतियों में दोनों सेनाओं का तालमेल अद्वितीय है।
📝 निष्कर्ष https ://shubhbhaskar.co.in
राष्ट्रहित से बड़ा कोई हित नहीं होता और मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के दौर में कूटनीतिक झिझक के लिए कोई जगह नहीं है। भारत और इजरायल के बीच एक मजबूत, औपचारिक और दूरगामी रक्षा समझौता किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत की अपनी संप्रभुता, अखंडता और आर्थिक प्रगति की सुरक्षा का एक मजबूत बीमा होगा। यह समझौता समय की मांग भी है और भारत के उज्जवल और सुरक्षित भविष्य की जरूरत भी।
हिंदुस्तान इजरायल में रक्षा समझौता होना चाहिए











