
पेंशनरों को साइबर अपराध से बचाव के बताए उपाय, पुलिस विभाग ने दिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश।
दैनिक शुभ भास्कर नागपाल शर्मा माचाड़ी राजस्थान-अलवर जिले के राजगढ़ उपखंड में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से पुलिस विभाग की ओर से उपकोष कार्यालय राजगढ़ में पेंशनर समाज उपशाखा राजगढ़ के पेंशनरों को साइबर क्राइम के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान पेंशनरों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए गए तथा साइबर अपराध होने की स्थिति में अपनाए जाने वाले आवश्यक कदमों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में पुलिस विभाग की ओर से पेंशनरों को बताया गया कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी विभिन्न तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनकी मेहनत की कमाई ठग रहे हैं। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनरों को फोन कॉल, फर्जी संदेश, अनजान लिंक, बैंक खाते से संबंधित जानकारी तथा ओटीपी के माध्यम से निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को सतर्क और जागरूक रहना बेहद आवश्यक है।
पेंशनरों को समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते की जानकारी,एटीएम पिन, पासवर्ड,ओटीपी अथवा अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करें। बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर फोन करने वाले व्यक्तियों की बातों में आकर कोई भी गोपनीय जानकारी नहीं दें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने,संदिग्ध मोबाइल ऐप डाउनलोड करने या लालच देने वाले संदेशों पर भरोसा करने से बचें।पुलिस विभाग ने यह भी बताया कि साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित बैंक से संपर्क कर खाते को सुरक्षित करवाएं और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराएं। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन आर्थिक धोखाधड़ी हो जाती है, तो बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान पेंशनरों को जागरूक करते हुए कहा गया कि डिजिटल सुविधाओं का उपयोग सावधानी के साथ करें तथा किसी भी प्रकार के आर्थिक लेन-देन से पहले पूरी जानकारी की पुष्टि अवश्य करें। साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत करना सबसे महत्वपूर्ण है।
इस जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य पेंशनरों को साइबर अपराधों के प्रति सचेत करना, उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना तथा उन्हें डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के लिए सक्षम बनाना रहा।











