
प्रेस वार्ता कर बृजेन्द्र सिंह गौर ने सरकारी और नजूल भूमि पर अवैध कब्जों का मामला उठाया, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोपों को बताया निराधार, बोले—सरकारी संपत्ति की सुरक्षा किसी जाति-धर्म का मुद्दा नहीं
ललितपुर। सरकारी एवं नजूल भूमि पर कथित अवैध कब्जों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस संबंध में बृजेन्द्र सिंह गौर ने प्रेस वार्ता कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया और जिला प्रशासन से सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई की मांग उठाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी इस मुहिम का किसी जाति, धर्म अथवा समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। इसका एकमात्र उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण सुनिश्चित कराना है। बृजेन्द्र सिंह गौर ने शासनादेशों, न्यायालय के आदेशों तथा नगर पालिका एवं राजस्व विभाग की जांच आख्या का हवाला देते हुए दावा किया कि मोहल्ला घुसयाना स्थित खेवट खाता संख्या-53 की भूमि राजस्व अभिलेखों में कलेक्ट्रेट प्रबंध की नजूल भूमि के रूप में दर्ज है। इसके अलावा मौजा ललितपुर की आराजी संख्या 514, 515, 516, 517 एवं 518 भी राजस्व अभिलेखों में नजूल भूमि के तौर पर दर्ज बताई गई हैं।
उन्होंने बताया कि संबंधित भूमि के पुराने पट्टे का नवीनीकरण नहीं हुआ है और न ही भूमि को फ्री होल्ड किए जाने से संबंधित कोई अभिलेखीय साक्ष्य सामने आया है। ऐसे में सरकारी दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराने तथा कथित अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोपों को बताया निराधार प्रेस वार्ता के दौरान बृजेन्द्र सिंह गौर ने अपनी मुहिम को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने से जोड़ने वाले आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि के संरक्षण की मांग को जाति और धर्म के चश्मे से देखना उचित नहीं है। यदि किसी भूमि की स्थिति को लेकर विवाद है तो उसका समाधान भावनाओं और आरोप-प्रत्यारोप के बजाय राजस्व अभिलेखों, वैधानिक दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और किसी भी राजनीतिक, सामाजिक अथवा अन्य दबाव से प्रभावित हुए बिना नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यदि जांच में सरकारी एवं नजूल भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित भूमि को नियमानुसार अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर सरकारी संपत्तियों के संरक्षण की आवाज उठाने वाले नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद क्या कदम उठाता है।











