
बेंगलुरु और अन्य क्षेत्रों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा, मामूली घटनाओं के बीच मतदान शांतिपूर्ण
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विशेष संवाददाता, दैनिक शुभ भास्कर
कर्नाटक बेंगलुरु: कर्नाटक विधान परिषद एमएलसी की चार महत्वपूर्ण सीटों के लिए हुआ मतदान सोमवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। इस चुनाव में राज्य के शिक्षकों, स्नातकों और प्रबुद्ध वर्ग के मतदाताओं ने भारी उत्साह दिखाते हुए लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राजधानी बेंगलुरु सहित चुनाव वाले सभी निर्वाचन क्षेत्रों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं।चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। कुछ संवेदनशील बूथों पर हल्की नोकझोंक और मामूली तकनीकी खामियों जैसी छिटपुट घटनाओं को छोड़कर कहीं से भी किसी अप्रिय घटना या हिंसा की खबर नहीं है। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर कड़े इंतजाम किए थे।त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा पेंच इस बार का विधान परिषद चुनाव सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जेडीएस गठबंधन के लिए बेहद प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है। चार सीटों पर हुए इस मुकाबले में कई दिग्गज उम्मीदवारों की राजनीतिक साख दांव पर लगी है। विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे राज्य की भावी राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।मतदाताओं में दिखा खासा उत्साह बेंगलुरु, मैसूर और अन्य जिलों के शिक्षक व स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सुबह मतदान की गति थोड़ी धीमी रही, लेकिन दोपहर होते-होते वोटिंग में तेजी आ गई। युवा स्नातकों और पहली बार वोट कर रहे शिक्षकों में अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए विशेष उत्साह देखा गया। महिला मतदाताओं ने भी पोलिंग बूथों पर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था। साथ ही, निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए कई केंद्रों पर वेबकास्टिंग और वीडियोग्राफी की व्यवस्था भी की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि सभी मतपेटियों और ईवीएम को कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखवा दिया गया है, जहां 24 घंटे सुरक्षा बल तैनात रहेंगे अब सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि प्रबुद्ध मतदाताओं ने इस बार राज्य की राजनीति में किसे ऊपरी सदन विधान परिषद का रास्ता दिखाया है।











