
भारतीय-अमेरिकी वोटर्स की संख्या बढ़ी, लेकिन अपनी भाषा में मतदान की सुविधा हर जगह नहीं;
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दैनिक शुभ भास्कर एक्सक्लूसिव
अमेरिका मिड-टर्म इलेक्शन: भारतीय-अमेरिकी वोटर्स की संख्या बढ़ी, लेकिन अपनी भाषा में मतदान की सुविधा हर जगह नहीं; टेक्सास में 6 लाख से ज्यादा देसी वोटर पर मतपत्र अंग्रेजी में वॉशिंगटन/शिकागो एजेंसी। अमेरिका में आगामी 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिड-टर्म मध्यावधि चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। इस चुनाव में भारतीय-अमेरिकी देसी मतदाताओं की भूमिका बेहद निर्णायक मानी जा रही है। हालांकि, एक हालिया समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में भारतीय मूल के वोटर्स की बढ़ती तादाद के बावजूद विभिन्न राज्यों में भारतीय भाषाओं में मतपत्र Ballots और मतदान सहायता की उपलब्धता में भारी असमानता देखी जा रही है। कुछ शहरों में जहां उंगलियों के इशारे पर हिंदी-गुजराती में वोट डालने की सुविधा है, वहीं कई बड़े राज्यों में लाखों भारतीयों को अपनी भाषा में मतपत्र तक मयस्सर नहीं हैं शिकागो में हिंदी-गुजराती की बहार, टेक्सास में ‘नो एंट्री’अमेरिका के अलग-अलग राज्यों और काउंटियों में भाषा संबंधी सुविधाओं का अंतर हैरान करने वाला है शिकागो: यहां चुनाव आयोग ने मिसाल पेश की है। शिकागो के सभी मतदान केंद्रों पर टचस्क्रीन और ऑडियो मतपत्रों में हिंदी, गुजराती और उर्दू भाषा का विकल्प दिया गया है टेक्सास: इस राज्य में 6.28 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी रहते हैं। इसके बावजूद, यहाँ के मतपत्रों में किसी भी भारतीय भाषा को शामिल नहीं किया गया है। हैरिस काउंटी में सिर्फ रिमोट फोन पर हिंदी दुभाषिया सेवा उपलब्ध है, जबकि मतपत्र केवल अंग्रेजी, स्पेनिश, वियतनामी और चीनी में ही हैं न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया: कैलिफोर्निया के कई काउंटियों में राज्य के कानून के तहत हिंदी, पंजाबी, बंगाली, उर्दू, तेलुगु, गुजराती और नेपाली में संदर्भ मतपत्र दिए जा रहे हैं। न्यूयॉर्क के क्वींस में बंगाली, हिंदी, पंजाबी और ब्रुकलिन में बंगाली व उर्दू के लिए दुभाषियों और मतपत्र उपकरणों की व्यवस्था है न्यू जर्सी के मिडलसेक्स काउंटी में फेडरल वोटिंग राइट्स एक्ट की धारा 203 के तहत एशियाई-भारतीय भाषाओं को कवर किया गया है, लेकिन धरातल पर सिर्फ गुजराती, हिंदी और पंजाबी में वोट-बाय-मेल आवेदन ही दिखे हैं, अनुवादित मुख्य मतपत्रों का अभाव है। आंकड़ों में समझें अमेरिका में भाषाई स्थिति’एएपीआई डेटा’ AAPI Data के अनुसार, अमेरिका में एशियाई वयस्कों के बीच हिंदी पांचवीं सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है 8.91 लाख वयस्क अमेरिका में हिंदी बोलते हैं। 5.29 लाख उर्दू, 4.98 लाख तेलुगु, 4.58 लाख गुजराती और 4.29 लाख लोग बंगाली बोलते हैं भारतीय-अमेरिकियों में करीब 16.7 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनकी अंग्रेजी पर पकड़ सीमित है। हालांकि यह अन्य एशियाई समूहों से कम है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पूरी भागीदारी के लिए यह एक बड़ी बाधा साबित होती है। फेडरल कानून और हेल्पलाइन से उम्मीद

अमेरिकी संघीय कानून के तहत, यदि किसी मतदाता को अंग्रेजी भाषा में दिक्कत है, तो वह मतदान बूथ के भीतर अपनी पसंद के किसी भी सहायक नियोक्ता या यूनियन प्रतिनिधि को छोड़कर को मदद के लिए साथ ले जा सकता है।

अतिरिक्त, मतदाता सहायता के लिए काम करने वाले संगठनों (APIAVote और Advancing Justice-AAJC) ने एक विशेष हॉटलाइन (1-888-API-VOTE) भी जारी की है, जिसके माध्यम से भारतीय मतदाता हिंदी, पंजाबी, बंगाली और उर्दू में चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़ी मदद हासिल कर सकते हैं। अमेरिकी जनगणना ब्यूरो दिसंबर 2026 में नए दिशानिर्देश जारी करेगा, जिससे तय होगा कि भविष्य में किन काउंटियों में भारतीय भाषाओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।











