
20 साल बाद फिर जीवंत हुई बांसी की ऐतिहासिक रामलीला, रावण के अत्याचारों से गूंजा मंच
दैनिक शुभ भास्कर सुरज सिंह उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड ललितपुर कमल नयन कमला पति स्वामी, अब लो अवतार दयानिधि’ की प्रार्थना से गूंजा रामलीला मंच, गुरुवार को होगा धनुष यज्ञ बांसी ललितपुर। बुंदेलखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा देते हुए कस्बा बांसी में 20 वर्ष बाद ऐतिहासिक रामलीला का मंचन दोबारा शुरू होने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। श्री हनुमान जी टौरिया मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला के दूसरे दिन मंगलवार की रात रावण दिग्विजय और भगवान श्रीराम के जन्म की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। प्रभु श्रीराम के जन्म के प्रसंग पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं दर्शक मौजूद रहे। मंदिर समिति ने गुरुवार की रात धनुष यज्ञ की लीला के मंचन की घोषणा की है।20 वर्ष बाद फिर शुरू हुई कस्बे की ऐतिहासिक रामलीला कस्बा बांसी स्थित श्री हनुमान जी टौरिया मंदिर में मंदिर समिति की पहल पर स्थानीय कलाकारों द्वारा ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा को पुनर्जीवित किया गया है। कस्बे के दिवंगत कलाकारों एवं सहयोगियों की स्मृति में शुरू की गई इस रामलीला का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना भी है। लंबे अंतराल के बाद रामलीला शुरू होने से स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।सोमवार को वाल्मीकि जयंती के अवसर पर शिव-पार्वती संवाद और नारद मोह की लीला का मंचन किया गया था। इसके बाद मंगलवार को रामलीला के दूसरे दिन रावण दिग्विजय और श्रीराम जन्म के प्रसंगों का मंचन हुआ। कलाकारों ने संवाद, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से दर्शकों को रामायण की कथा से जोड़ दिया।रावण, कुंभकरण और विभीषण की तपस्या से शुरू हुई लीला मंगलवार की रात रामलीला का शुभारंभ रावण, कुंभकरण और विभीषण की कठोर तपस्या के प्रसंग से हुआ। तीनों भाइयों की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा प्रकट हुए और उन्हें वरदान प्रदान किए। वरदान प्राप्त करने के बाद रावण की शक्ति और अहंकार बढ़ने लगा। इसके बाद रावण का विवाह मयदानव की पुत्री मंदोदरी से हुआ।लीला में दिखाया गया कि रावण ने अपनी शक्ति के बल पर कुबेर पर आक्रमण कर पुष्पक विमान और लंका पर अधिकार कर लिया। इतना ही नहीं, उसने अपने पुत्र मेघनाद को भेजकर देवताओं को बंदी बना लिया और उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने के लिए विवश कर दिया। रावण के बढ़ते अत्याचारों से देवता त्रस्त हो उठे। पृथ्वी पर भी अन्याय और अत्याचार बढ़ने लगे।देवताओं की करुण पुकार पर भगवान विष्णु ने लिया अवतार का संकल्प रावण के अत्याचारों से परेशान देवताओं और पृथ्वी ने भगवान ब्रह्मा तथा भगवान शिव के समक्ष अपनी पीड़ा रखी। सभी ने मिलकर भगवान विष्णु से पृथ्वी को रावण के आतंक से मुक्त कराने की प्रार्थना की। इसी प्रसंग में रामलीला का मंच भक्तिमय प्रार्थना से गूंज उठा—“कमल नयन कमला पति स्वामी, अब लो अवतार दयानिधि, अब लो अवतार। इतने बहुत अन्याय हुए हैं, आप सिंधु में पड़े हुए हैं, हम कर जोड़े खड़े हुए हैं।”देवताओं की करुण पुकार सुनकर आकाशवाणी हुई कि भगवान अपने अंशों सहित पृथ्वी पर अवतार लेंगे। इस प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों ने देवताओं की व्याकुलता और भगवान से की गई प्रार्थना का प्रभावशाली मंचन कर रामायण के उस महत्वपूर्ण मोड़ को जीवंत कर दिया, जहां अधर्म के अंत और धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्रीराम के अवतरण का मार्ग प्रशस्त होता है पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद अयोध्या में गूंजा श्रीराम जन्म का उल्लास लीला के अगले प्रसंग में अयोध्या के राजा दशरथ की संतान प्राप्ति की चिंता को दर्शाया गया। संतान न होने के कारण राजा दशरथ दुखी रहने लगे थे।
उन्होंने अपने गुरु वशिष्ठ को बुलाकर अपनी व्यथा बताई। राजा की चिंता सुनकर गुरु वशिष्ठ ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराने का मार्ग सुझाया यज्ञ के दौरान अग्निदेव प्रकट हुए और राजा दशरथ को हवि प्रदान की। राजा दशरथ ने उसे अपनी तीनों रानियों में वितरित किया। इसके फलस्वरूप अयोध्या में चार राजकुमारों का जन्म हुआ। राजा दशरथ के महल में भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म से खुशियां छा गईं गुरु वशिष्ठ ने चारों राजकुमारों का नामकरण किया। आगे की लीला में चारों भाइयों के गुरु आश्रम जाकर विद्या अध्ययन करने के प्रसंग को भी दर्शाया गया। भगवान श्रीराम के जन्म की लीला के साथ रामलीला के दूसरे दिन का मंचन संपन्न हुआ। इस दौरान उपस्थित दर्शक धार्मिक प्रसंगों में भाव-विभोर नजर आए।गुरुवार की रात होगा धनुष यज्ञ का मंचन श्री हनुमान जी टौरिया मंदिर समिति के प्रबंधक सुदामा प्रसाद दुबे ने बताया कि कस्बे की ऐतिहासिक रामलीला को दोबारा शुरू करने का प्रयास स्थानीय कलाकारों, सहयोगियों और श्रद्धालुओं के सहयोग से साकार हुआ है। उन्होंने बताया कि रामलीला के अगले चरण में गुरुवार की रात धनुष यज्ञ की लीला का मंचन किया जाएगा। इस प्रसंग में भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग करने और माता सीता के स्वयंवर से जुड़े घटनाक्रमों का मंचन आकर्षण का केंद्र रहेगा।20 वर्ष बाद शुरू हुई रामलीला ने बांसी में धार्मिक उत्साह के साथ सांस्कृतिक विरासत को संजोने की उम्मीद भी जगाई है। स्थानीय कलाकारों की भागीदारी और दर्शकों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि क्षेत्र की पारंपरिक रामलीला के प्रति लोगों का लगाव आज भी कायम है। चाहें तो इस खबर को दैनिक जागरण, अमर उजाला या हिंदुस्तान की स्थानीय संस्करण शैली में और अधिक संक्षिप्त, प्रभावशाली तथा समाचार-पत्र के पेज पर प्रकाशित होने योग्य रूप में भी तैयार किया जा सकता है।











