
इसराइल में जनसांख्यिकी और सामाजिक-राजनीतिक बहस
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दैनिक शुभ भास्कर यरूशलम। इसराइल के हालिया त्रिशंकु चुनावी नतीजों के बाद, देश के भीतर जनसांख्यिकी संतुलन और आबादी के बदलते आंकड़ों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। यहूदी बहुसंख्यक राष्ट्र के रूप में इसराइल की पहचान और वहां रहने वाले अरब-मुस्लिम नागरिकों की बढ़ती आबादी के बीच सामंजस्य स्थापित करना आने वाले समय में नीति-निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।क्या हैं जनसांख्यिकी आंकड़े आधिकारिक सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार, इसराइल की कुल आबादी में लगभग 73% से 74% हिस्सेदारी यहूदी आबादी की है, जबकि लगभग 21% आबादी अरब नागरिकों की है, जिनमें बहुसंख्यक मुस्लिम हैं बाकी ईसाई और द्रूज समुदाय से हैं। हाल के वर्षों में दोनों समुदायों की जन्म दर Fertility Rate में बदलाव देखे गए हैं, जिसने इसराइल के नीतिगत गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं दक्षिणपंथी विचारकों और यहूदी समुदाय की चिंताएं इसराइल के दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों और पारंपरिक यहूदी संगठनों का मानना है कि देश की मूल पहचान को बनाए रखने के लिए यहूदी बहुसंख्यक आबादी का एक निश्चित स्तर पर बने रहना बेहद जरूरी है।यहूदी राष्ट्र के स्वरूप पर प्रभाव: कुछ रूढ़िवादी विचारकों का तर्क है कि यदि भविष्य में अरब-मुस्लिम आबादी का अनुपात बहुत अधिक बढ़ता है, तो संसद नेसेट में उनकी राजनीतिक ताकत और बढ़ेगी। इससे भविष्य में इसराइल को ‘यहूदी राष्ट्र’ घोषित करने वाले बुनियादी कानूनों में बदलाव की मांग उठ सकती है। समान नागरिक और सामाजिक चिंताएं: सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता के दृष्टिकोण से, दक्षिणपंथी धड़ा यह मांग करता रहा है कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो यहूदी प्रवासन Aliyah को बढ़ावा दें और देश के भीतर जनसांख्यिकी संतुलन को बिगड़ने न दें।उदारवादी दृष्टिकोण और जनसंख्या नियंत्रण पर कानूनी पहलू दूसरी ओर, समाजशास्त्रियों और आधुनिक विश्लेषकों का मानना है कि जनसंख्या को किसी खास समुदाय के खिलाफ कानून बनाकर नियंत्रित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत हो सकता है बदलती जन्मदर: आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ हाल के दशकों में इसराइली अरब-मुस्लिम महिलाओं की जन्मदर में गिरावट आई है, जबकि इसके विपरीत अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स कट्टरपंथी यहूदी परिवारों में जन्मदर काफी अधिक औसत 6 से अधिक बच्चे बनी हुई है। इसलिए, विश्लेषकों का कहना है कि जनसांख्यिकी संतुलन केवल अरब आबादी पर निर्भर नहीं है समान अधिकार और विकास: उदारवादी गुटों का तर्क है कि अरब आबादी को शिक्षा और रोजगार के मुख्यधारा के अवसरों से जोड़कर सामाजिक स्थिरता पाई जा सकती है, न कि उनके अधिकारों को सीमित करके। इसराइल के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह एक लोकतांत्रिक देश के रूप में अपने सभी नागरिकों को समान अधिकार भी दे और साथ ही दुनिया के एकमात्र ‘यहूदी गृहभूमि’ Jewish Homeland के अपने मूल संकल्प को भी सुरक्षित रखे। आने वाले समय में बनने वाली नई सरकार की नीतियां इस संतुलन को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।











